मुख्य पृष्ठ / आध्यात्मिक पर्यटन
धार्मिक पर्यटकों के लिए गौवंश वन्य विहार को प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किए जाने की अपार संभावनाएं हैं। यहाँ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान जैसे गौपूजन, जन्मदिन, शादी, पितृ संस्कार एवं श्राद्ध के अवसर पर गायों के लिए दान तथा उन्हें चारा-चोकर प्रदान करने का प्रबंध किया जा रहा है। हिंदुओं द्वारा किए जाने वाले अनुष्ठानों में गाय के गोबर, मूत्र एवं दूध को भी पवित्र वस्तुओं के रूप में उपयोग किया जाता है।
जन्मदिन, विवाह, पितृ संस्कार व श्राद्ध जैसे अवसरों पर गौ-दान एवं गौपूजन की व्यवस्था।
सहयोग राशि के माध्यम से समारोह एवं आयोजन हेतु रेस्ट हाउस का उपयोग किया जा सकता है।
इच्छुक व्यक्ति सहयोग राशि द्वारा गौशाला में स्थापित यज्ञशाला का उपयोग कर सकते हैं।
रीवा जिला हवाई, रेल एवं सड़क मार्ग से देश के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार रीवा मुख्यालय से मात्र 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गौशाला में आए पर्यटकों को गौतीर्थ के अनुभव के साथ ही जिले के विभिन्न पर्यटक स्थलों की यात्रा भी कराई जा सकेगी।
| पर्यटन स्थल | गौशाला से दूरी |
|---|---|
| पुरवा जलप्रपात | 2 किलोमीटर |
| पियावन घिनौची धाम | 10 किलोमीटर |
| चचाई जलप्रपात | 15 किलोमीटर |
| क्योटी जलप्रपात | 29 किलोमीटर |
| रीवा का किला | 32 किलोमीटर |
| रानी तालाब | 32 किलोमीटर |
| गोविंदगढ़ पैलेस तालाब | 32 किलोमीटर |
| गैवीनाथ मंदिर | 32 किलोमीटर |
| देउर कोठार | 54 किलोमीटर |
| सफेद बाघ की सफारी (मुकुंदपुर) | 47 किलोमीटर |
| बहती जलप्रपात | 84 किलोमीटर |
गौशाला में रुकने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक, सस्टेनेबल, इको-फ्रेंडली तथा धार्मिक रूप से पवित्र वातावरण में ठहरने की सुविधा देने के लिए गोबर से बने हुए कॉटेज स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं, जो गौशाला में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
दौरे की योजना हेतु संपर्क करें